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हड़कंप
KOTA कोटा: सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत और किडनी फेल होने के मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब तक 13 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 4 महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि 9 महिलाओं में किडनी फेल होने के लक्षण पाए गए हैं। लगातार बढ़ते मामलों के बाद अस्पतालों में दहशत का माहौल है।
ताजा मामला JK Lon Hospital का है, जहां डीसीएम श्रीराम कॉलोनी निवासी पिंकी महावर की डिलीवरी के बाद हालत बिगड़ गई। उन्हें सुपर स्पेशियलिटी विंग में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान देर रात उनकी मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं।
परिवार का कहना है कि ऑपरेशन के बाद पिंकी की किडनी ने काम करना बंद कर दिया था और लगातार शिकायत के बावजूद डॉक्टरों ने समय पर गंभीर कदम नहीं उठाए। बाद में उनकी बच्चेदानी निकालने के लिए दोबारा ऑपरेशन किया गया। परिजनों का आरोप है कि उन्हें मरीज की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं दी गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल Nilesh Jain और 5 सदस्यीय जांच समिति ने अस्पताल पहुंचकर मरीजों के इलाज और रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि मामलों के पीछे संक्रमण, ऑपरेशन प्रक्रिया या अन्य चिकित्सकीय कारण जिम्मेदार हैं या नहीं। सूत्रों के अनुसार, दो दिनों में 52 सिजेरियन डिलीवरी हुई थीं, जिनमें कई महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी की थीं। प्रशासन ने कहा है कि सभी मामलों की विस्तृत जांच की जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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